
सुनीता गाबा
वैसे तो आज के बच्चे पुराने बच्चों से अधिक स्मार्ट और इंटेलिजेंट हैं। फिर भी माता-पिता चाहते हैं हमारा बच्चा ऑल राउंडर हो औरों से अधिक स्मार्ट और बुद्धिमान हो। बच्चों में यह सभी गुण हों, इसके लिए माता पिता को चाहिए कि बचपन से उनका आई क्यू अच्छा हो ताकि वो बुद्धिमान और स्मार्ट बन सकें।
आइए देखें हम कैसे बच्चों की मदद कर उनका आई क्यू लेवल बढ़ा सकते हैं।
- बच्चों के साथ प्रारंभ से बातचीत करें। हर विषय पर बात करें ताकि उनका बोलने का तरीका भी बेहतर हो सके और हर विषय के बारे में जानकारी भी बढ़ सके। इससे बच्चों की भाषा में भी सुधार आता है।
- विभिन्न आकार, नाम और रंग वाली चीजों के बारे में बच्चों को बातों बातों में बताएं। तस्वीरों के जरिए उन्हें बताते और पूछते रहें।
- बच्चों को खेल-खेल में कोई न कोई एक्टिविटी कराते रहें ताकि उनकी भाषा और दूरदृष्टि बढ़ती रहे।
- बचपन से बच्चों को उनकी आयु अनुसार खेल और किताबें दें। उन्हें खेलना सिखाएं और शुरू में खुद कहानियां तस्वीर के साथ समझा कर बताएं। थोड़े बड़े बच्चें को स्टोरी बुक पढऩे को दें और उन्हें अपनी भाषा में स्टोरी सुनाने को कहें। इससे उनकी स्मरण शक्ति का विकास होगा।
- फल और सब्जी की मात्रा को गिनना सिखाएं ताकि गिनती सीख सकें। थोड़े बड़े होने पर पैकेट में से 2 बिस्किट निकालने को कहें, फिर 2 और इस प्रकार उन्हें कहें – गिनो कुल कितनेे बिस्किट हैं। इसी प्रकार माइनस करना भी सिखा सकते हैं।
- बच्चों को पजल्स गेम दें। उन्हें हल करना सिखाएं और बाद में समय सीमा में बांधें।
- बच्चों को उनकी छोटी-छोटी समस्याएं खुद सुलझाने को प्रेरित करें जैसे पानी की बोतल, बैग, जूते, मैले कपड़े कहां रखने हैं, अपने कपड़े अलमारी में रखें, अपना टॉय बॉक्स साफ रखना, पढऩे की मेज साफ रखना, किताबें एक स्थान पर रखना आदि जिससे उन्हें बचपन से अपनी चीजों की देखभाल और उचित जगह पर रखने की आदत पड़ जाएगी। थोड़ा बड़ा होने पर समय पर तैयार होने की आदत भी डलवाएं।
- घर पर थोड़े रंगीन कागज, ग्लू, क्रेयॉन्स, रंगीन पैंसिल, छोटी कैंची आदि रखें ताकि बच्चे को कुछ नया बनाने की प्रेरणा मिले और उनके हाथों, उंगलियों का कंट्रोल भी बना रह सके। कुछ सजावटी सामान भी रखें जैसे शीशे, मोती, विभिन्न दालें आदि ताकि जो क्राफ्ट की वस्तु उन्होंने बनाई हो, उसे और सुंदर कैसे बनाया जाए सीख सकें।
- बच्चों को दूसरे बच्चों के साथ खेलने, शेयर करने की आदत भी ढाई तीन साल की उम्र से डालें।
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