मुंबई कांग्रेस के द्वारा कजरी महोत्सव और उत्तर भारतीय पिछड़ा वर्ग सम्मेलन समारोह संपन्न

उत्तर भारत के भोजपुर और पूर्वांचल क्षेत्र में सावन के महीने में गाये जानेवाले लोकगीत कजरी अर्ध-शास्त्रीय गायन की विधा के रूप में प्रसिद्ध है। चूँकि मुंबई जैसे महानगर में रहनेवाले ज्यादातर उत्तर भारतीय कजरी के गीतों को अपनी संस्कृति का अभिन्न अंग मानते है। इनमें से अधिकाधिक पिछड़े वर्ग से आते है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम के द्वारा कजरी महोत्सव और उत्तर भारतीय पिछड़ा वर्ग सम्मेलन का आयोजन दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में किया गया। इस समेल्लन में राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

उत्तर भारत पिछड़ा समाज कुर्मी, जैसवार, जायसवाल, राजभर, गुप्ता, नाई, यादव, विश्वकर्मा, पटवा, मौर्या, चौरसिया, बिंद और प्रजापति बिरादरी के साथ-साथ अन्य कई बिरादरी के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी इस सम्मेलन में समिल्लित हुए।

ओबीसी आयोग को सैवंधानिक दर्जा दिलाने के लिए प्रस्तावित बिल में किये जा रहे बदलाव के बारे में हुसैन दलवई ने जानकारी दी। मुंबई अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि ओबीसी आयोग का गठन एक अच्छी पहल है बशर्ते अगर इसका लाभ पूरे देश के पिछड़े वर्ग को मिले। किन्तु सवर्णों की भारतीय जनता पार्टी कभी इस बिल को पारित नहीं होने देगी। इसलिए मुंबई के उत्तर भारतीय पिछड़े वर्गों को अपने आरक्षण के अधिकार को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। मुंबई में ओबीसी समाज को आरक्षण का लाभ लेने के लिए सिर्फ डोमिसाइल सर्टिफिकेट को आधार बनाया जाना चाहिए।

इसके उपरांत पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर पूरी दुनिया में एक करोड़ किलोमीटर साइकिल चलाने वाले हीरालाल यादव को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। साथ ही पिछड़े समाज के विभिन्न जातियों में सामाजिक कार्य करनेवाले वरिष्ठ जनों का भी सम्मान मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के हाथों से हुआ।

जायसवाल समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे समाजसेवक लालचंद गुप्ता ने कहा कि संजय निरुपम जी ने बड़े जरुरी मसले में काम करना प्रारम्भ किया है। अगर अधिकार की इस लड़ाई में वे सफल होते हैं, तो इसका सीधा-सीधा लाभ मुंबई में रहनेवाले लगभग ७० % उत्तर भारतीयों को मिलेगा।

लोकगीत गायिका संध्या मिश्रा ने अपनी सुमधुर आवाज में कजरी गीत गाकर लोगो को ग्रामीण अंचल की याद दिलाई।

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