
सकारात्मक दृष्टिकोण
सीताराम गुप्ता
एक बार एक उद्योगपति एक विमान से यात्रा कर रहा था। विमान से उतरने के फ़ौरन बाद उसे एक ज़रूरी मीटिंग में जाना था। उड़ान के दौरान जब एक विमान परिचारिका उसे भोजन सर्व कर रही थी तो न जाने कैसे उसके क़मीज़ पर कुछ भोजन गिर गया और उसका क़मीज़ गंदा हो गया।
विमान के कर्मचारियों ने उससे क्षमा याचना की लेकिन उसे बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि विमान से उतरने के फ़ौरन बाद उसे एक ज़रूरी मीटिंग में जाना था और उसके पास दूसरे कपड़ों की व्यवस्था करने का समय नहीं था। गुस्से में उसने फ़ैसला किया कि भविष्य में कभी भी इस एयरलाइन से यात्रा नहीं करूँगा।
अपने गंतव्य पर पहुँचने के बाद जैसे ही वह एयरपोर्ट की इमारत में दाखिल हुआ, उस एयरलाइन का एक सीनियर मैनेजर उसका इंतज़ार करता मिला। वह उन्हें अपने कक्ष में ले गया। वहाँ पर ठीक उसी के साइज़ की बेहतरीन कि़स्म की तीन क़मीज़ें रखी हुई थीं। मैनेजर ने उद्योगपति से यात्रा के दौरान हुई घटना के लिए पुन: क्षमायाचना की और नई क़मीज़ बदलने का आग्रह किया। वापसी में न केवल उनकी अपनी क़मीज़ साफ करवाकर लौटा दी गई अपितु शेष दो क़मीज़ें भी उन्हें उपहार के रूप में दे दीं।
एयरलाइन के कर्मचारियों के इस व्यवहार ने उसे अपना उपरोक्त फ़ैसला बदलने के लिए मजबूर कर दिया। उसने एक और फ़ैसला किया और वो यह कि भविष्य में जब भी यात्रा करूँगा, केवल इसी एयरलाइन से यात्रा करूँगा। संबंध चाहे व्यक्तिगत हों अथवा व्यावसायिक उनको बनाने में हमारा दृष्टिकोण बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अच्छे व्यक्तिगत संबंध और व्यावसायिक सफलता दोनों के लिए ही हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक और आशावादी होना अपेक्षित है।


