सोशल मिडिया और पत्रकारिता – निखिल हरपुड़े 

 
 

 

पूरा देश सन्न रह गया जब बी.एस.एफ. जवान तेज बहादुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो लोगों तक पहुंचाया जिसमें उसने देश की रक्षा कर रहे जवानों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए थे। देखते ही देखते उस वीडियो के वायरल होते ही सरकार की नींद टूटी और जवानों को दिए जा रहे खाने की गुणवत्ता टटोलने के आदेश दिए गए। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी ने अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्त की हो बल्कि सोशल मीडिया उन लोगों के लिए हथियार का काम कर रहा है जो लोग किसी TV चैनल या अखबार तक सीधे नहीं पहुंच सकते हैं या ऐसी मान्यता है कि वहाँ उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।

आज के दौर में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसके पास मोबाइल फोन ना हो और जो अपने मोबाइल में WhatsApp, Facebook, Twitter और instagram ना इस्तेमाल करता हो। सोशल मीडिया के माध्यम से हमें पल-पल की खबर मिलती रहती है। कभी-कभी तो किसी राजनेता, अभिनेता या बिजनेसमैन का एक ट्वीट ही पूरे दिन की सुर्खियां बना रहता है। सोशल मीडिया के माध्यम से आप अपने विचार और आपकी दिनचर्या लोगों तक पहुंचा सकते हैं। बहुत से लोगों को अपना लाइफ पार्टनर इसी सोशल मीडिया के माध्यम से मिला है। सोशल मीडिया ही वह कड़ी बन कर उभरा है जहाँ दो अनजान लोग दोस्त बन जाते हैं और कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें दो अनजान लोगों में चैट करते करते प्यार भी हुआ है और वह जिंदगी भर के हमसफ़र बन गए हैं। आजकल तो लोग सोशल मीडिया के माध्यम से ही मंगनी और शादी भी कर लेते हैं।

यहाँ तक कि कुछ लोगों का तो तलाक भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही हो जाता है। सोशल मीडिया रचनात्मक लोगों के लिए एक तरह से वरदान बन गया है। अक्सर रचनात्मक लेख, कविताएं, गज़लें इत्यादि सोशल मीडिया पर देखने-पढ़ने को मिल जाती हैं। नेताओं के प्रचार का तो सोशल मीडिया पूरी तरह अस्त्र बन गया है। किसी भी बड़े नेता के प्रचार की सोशल मीडिया के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती। सांसद, विधायक, नगरसेवक, ग्रामपंचायत सदस्य वगैरह इस माध्यम का उपयोग जनसंपर्क के लिए खूब कर रहे हैं। अपने क्षेत्र में किए गए कार्यों को वह पल भर में अपने मतदाताओं और क्षेत्र की जनता तक पहुंचा देते हैं। अक्सर ऐसे मामलों में कुछ ऑनलाइन विरोध भी देखने को मिलता है। कभी-कभी यह विरोध फूहड़ और अश्लील भी हो जाता है। सोशल मीडिया के इस नकारात्मक पहलू पर भी विचार किया जाना चाहिए लेकिन ऑनलाइन होने और किसी के अंकुश में न होने के कारण ऐसा कर पाना मुश्किल जरूर है। अगर सोशल मीडिया का उजला पहलू है तो इसके नुकसान भी कम नहीं हैं।

आज के दौर में लोग सोशल मीडिया पर पूरी तरह से निर्भर हो चुके हैं जो हमारे लिए घातक साबित हो सकता है। अक्सर देखने में आया है कि सोशल मीडिया पर किसी के खो जाने का समाचार तेजी से वायरल होता है। विशेषकर बच्चों के मामले ज्यादा सामने आए हैं। सोशल मीडिया में जो बच्चा खो जाता है वह बच्चा वापस मिल जाने के बावजूद भी सोशल मीडिया पर खोया ही रहता है। घूम-फिर कर वह मैसेज दोबारा लौटता रहता है। इसलिए हम सोशल मीडिया पर पूरी तरीके से भरोसा नहीं कर सकते।

आजकल तो सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों में डर और भ्रम के वातावरण का भी निर्माण किया जाता है जहाँ भगवान से जुड़े मैसेजेस फॉरवर्ड किए जाते हैं और उनमें लिखा होता है कि इसे आप 10 लोगों को फॉरवर्ड करें वरना आपके साथ कोई दुर्घटना घटेगी या आपके साथ कुछ अच्छा होगा। कुछ लोग ऐसे मैसेजेस फॉरवर्ड कर देते हैं जिससे दूसरे लोगों में भी इस मैसेज को फॉरवर्ड करने की होड़ लग जाती है। कई बार लोग खबरों की पुष्टि नहीं करते और उस खबर को सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरे लोगों तक पहुंचा देते हैं जिसका असर यह होता है कि लोग गलत खबर का शिकार हो जाते हैं जिससे हमें बचने की आवश्यकता है। अफवाहों को फैलाने में सोशल मीडिया काफी बदनाम है। आज के दौर में आप यह कह सकते हैं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हम नहीं कर रहे हैं बल्कि सोशल मीडिया हमें इस्तेमाल कर रहा है। अगर सोशल मीडिया का सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो यह पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने का काम करेगा।

 
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