
महिलाओं के लिए असुरक्षित है देश की राजधानी दिल्ली
सीतेश कुमार द्विवेदी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र अपराधियों के लिए मुफीद जगह हो गई है। उन्हें यहां अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में ज्यादा माकूल माहौल मिलता है। एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाला यह देश का तीसरा बड़ा महानगर 1483 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। देश के इस तीसरे सबसे बड़े शहर में हर पल कुछ गड़बड़ होने या आतंकी कुकृत्य होने का अंदेशा रहता है।
राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए एवं वृद्धों के लिए नितांत असुरक्षित है। महिलाओं के प्रति अन्याय वाले शीर्ष क्र म में यह दिल्ली भी है। यहां की पुलिस भ्रष्टाचार में भी नंबर एक है।
भारत की राजधानी दिल्ली में रह रहे नागरिकों को महिलाओं के प्रति अपने नजरिए में बदलाव की जरूरत है। दिल्ली के लोगोंं को न केवल अपने व्यवहार अपितु बातों में भी साफ्टनेस लाने की जरूरत है। बहुत से लोगों की दृष्टि में दिल्लीवासियों में ठेठ अक्खड़पन अर्थात व्यवहार में नम्रता एवं उदारता का नितांत अभाव है।
यहां जबरदस्त कन्या भ्रूण हत्याएं होती हैं। यहां की सोनोग्राफी मशीनें कन्या होने की जानकारी देकर हत्या के लिए उकसाती हैं। इसीलिए यहां लिंगानुपात 821 स्त्री प्रति हजार पुरूष के पीछे है। कुल आबादी में लगभग 76 लाख पुरूष एवं 62 लाख महिलाएं हैं। यहां के पुरूषों में से 87 प्रतिशत से ज्यादा साक्षर हैं। कन्या भ्रूण हत्या का कारण यहां की साक्षरता है या असुरक्षा की भावना है अथवा दीगर कारण है, यह अस्पष्ट है।
समाचार माध्यमों के अनुसार दिल्ली महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि में सबसे असुरक्षित शहर है। मुंबई को भी सुरक्षा की दृष्टि से कमजोर शहर माना गया है लेकिन दिल्ली ने इस मामले में मायानगरी मुंबई को परास्त कर टाप में स्थान बना लिया है।
यहां महिलाएं न सिर्फ रात के अंधेरे में घर से निकलने में कतराती हैं अपितु यहां दिन का उजाला भी अब उन्हें खतरनाक प्रतीत होने लगा है। किसी आयु की नारी एकाकी हो या तीन हों तो समझिए किसी भी पल यहां के नारी पिपासु भेडिय़ा मानव दबोच लेंगे। बेदिल हो गई दिल्ली महिलाओं के प्रति सबसे क्रूर है।


