गिरगिट की तरह रंग बदलता पाकिस्तान

डा. गौरीशंकर राजहंस

पिछले दिनों जिस प्रकार पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने यह एलान किया कि अब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता बंद हो गई है तथा भारत जांचदल पठानकोट के गुनहगारों का पता लगाने के लिए पाकिस्तान नहीं जा सकेगा तो यह जानकर न केवल भारत बल्कि सारी दुनिया के लोग हतप्रभ रह गये।
सच यह है कि नवाज शरीफ कुछ भी दावा करें, वे एक अत्यंत ही कमजोर प्रधानमंत्री हैं और उनकी हिम्मत नहीं है कि वे पाकिस्तान की सेना या उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के विरूद्ध कोई कदम उठा सकें। इसलिए इस सत्य को स्वीकार करके अब भारत की सरकार को पाकिस्तान के बारे में अपनी नीति तय करनी होगी। पाकिस्तान का यह इतिहास रहा है कि उसके कहने और करने में बहुत अंतर है और किसी भी हालत में पाकिस्तान भारत के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने को तैयार नहीं है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि पाकिस्तान में फौज और आईएसआई का ही वर्चस्व है। ये दोनों यह समझते हैं कि यदि भारत के साथ संबंध सामान्य हो गये तो उनकी चलती समाप्त हो जाएगी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा को कहा था कि भारत को यह डर है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहीं आतंकवादियों के हाथ नहीं लग जाएं।

सच कहा जाए तो यह डर निर्मूल नहीं है। यह सोचना कि पाकिस्तान सबकुछ भूलकर फिर से भारत के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करेगा, एक बहुत बड़ी भूल होगी। भारत ने यह भी आशा की थी कि जब भारतीय टीम पाकिस्तान जाएगी तब वह कुख्यात आतंकवादी मौलाना मसूद से भी जवाब तलब करेगी परंतु पाकिस्तान की सरकार और उसकी सेना को यह पता है कि ऐसा होने पर मसूद कह सकता था कि उसने जो कुछ किया, वह पाकिस्तान के सरकार और सेना के कहने पर किया। इसी कारण भारत के जांच दल को पाकिस्तान जाने नहीं दिया गया।

सबसे चिंता की बात यह है कि अब चीन खुलेआम पाकिस्तान की मदद कर रहा है। अभी हाल में भारतीय वायुसेना के कुछ उच्च अधिकारियों ने यह चिंता जताई थी कि पिछले कुछ वर्षों में वायुसेना को मजबूत नहीं किया गया है। उसने पर्याप्त लड़ाकू विमानों की खरीद नहीं की है और यदि दो पड़ोसी देश के लड़ाई हो जाए तो भारत बड़ी कठिनाई में पड़ सकता है। पिछली सरकार ने जो गलती की, उसकी आलोचना करने से क्या लाभ है? यह मानकर चलना चाहिए कि पाकिस्तान और चीन भारत को बुरी तरह परेशान कर सकते हैं।

सबसे आवश्यक यह है कि जिस तरह बांग्लादेश युद्ध के पहले स्व. इंदिरा गांधी ने अनेक देशों में घूम घूमकर पाकिस्तान के नापाक रवैय्ये को उजागर किया था और सारी दुनिया को कहा था कि पश्चिमी पाकिस्तान के आकांओं के अत्याचार के कारण पूर्वी पाकिस्तान के हजारों शरणार्थी हजारों की संख्या में प्रतिदिन भारत आ रहे हैं जिसका भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस तरह एक प्रबल जनमत पाकिस्तान के विरुद्ध खड़ा हुआ था जिसने बांग्लादेश की लड़ाई में भारत को विजय प्राप्त करने में बड़ी मदद थी। वैसा ही कुछ अब करना पड़ेगा।

समय आ रहा है कि अब पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के नापाक इरादों को उजागर करें क्योंकि पाकिस्तान आतंकवादियों को भारत में चोरी छिपे भेजना बंद नहीं करेगा। समय आ गया है जब पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए।

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