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होम फ्रैंडली ऑफिस का बढ़ता चलन

उषा जैन ‘शीरीं’ सर्जना कायनात ट्रैव्हल्स  में बतौर मैनेजर कार्य कर रही थी। बेबी होने के बाद उसके लिए घर – बाहर दोनों फ्रंट संभाल पाना मुश्किल हो रहा था। सो उसने नौकरी छोडऩा तय किया लेकिन एक मेहनती काबिल और अनुभवी एम्पलॉयी से कंपनी हाथ नहीं धोना चाहती थी। सो उन्होंने सर्जना को घर से ही कम्प्यूटर व टेलीकम्युनिकेटिंग के जरिए ऑफिस प्रोजेक्ट्स…

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येन – केन – प्रकारेण के सिद्धांत को मानता है कार्पोरेट जगत!

येन – केन – प्रकारेण के सिद्धांत को मानता है कार्पोरेट  जगत! मिथिलेश कुमार सिंह जाने माने फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर की 2006 में एक फिल्म आयी थी कार्पोरेट। कहा जाता है कि मधुर भंडारकर की तमाम फिल्में यथार्थ पर आधारित होती हैं और बिपाशा बसु और के.के. मेनन जैसे अभिनेताओं के अभिनय से सजी यह फिल्म देखने के बाद यह यकीन हो जाता है कि भारतीय…

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आसान नहीं है कर प्रबंधन को हल करना

आसान नहीं है कर प्रबंधन को हल करना नरेंद्र देवांगन सफेदपोशों की करतूत है कालाधन। जनकल्याण के लिए जरूरी रकम में से हिस्सा मार लेने की बाजीगरी अब कर प्रबंधन यानी टैक्स मैनेजमेंट कहलाती है। कालाधन भारतीय अर्थव्यवस्था को दीमक के समान चाट रहा है। धन्ना सेठों की तिजोरी से देश-विदेश के बैंकों में बेनामी खातों, प्रॉपर्टी, हवाला और सट्टेबाजी तक में…