तेल व्यापार से आगे की सोच है सऊदी अरब की! मिथिलेश कुमार सिंह बीते दिनों में वैश्विक सम्बन्धों में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। खासकर ईरान पर से तमाम आर्थिक प्रतिबन्ध हटा लेने के पश्चात सऊदी अरब के माथे पर बल पडऩा स्वाभाविक ही हैं क्योंकि कच्चे तेल के क्षेत्र में प्रतियोगिता और बढऩे ही वाली हैं। कहा जा सकता है कि सऊदी अरब के आर्थिक संकट के मुहाने पर…
सकारात्मक दृष्टिकोण सीताराम गुप्ता एक बार एक उद्योगपति एक विमान से यात्रा कर रहा था। विमान से उतरने के फ़ौरन बाद उसे एक ज़रूरी मीटिंग में जाना था। उड़ान के दौरान जब एक विमान परिचारिका उसे भोजन सर्व कर रही थी तो न जाने कैसे उसके क़मीज़ पर कुछ भोजन गिर गया और उसका क़मीज़ गंदा हो गया। विमान के कर्मचारियों ने उससे क्षमा याचना की लेकिन उसे बहुत गुस्सा आ…
नरेंद्र देवांगन सरकार आर्थिक प्रगति को चहुंमुखी बनाने की दिशा में काम करते हुए कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने को विशेष प्राथमिकता दे रही है। वह गांव के उत्पाद को अच्छा बाजार प्रदान करके कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण और कृषि विकास बैंक को मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है। कृषि उत्पादों को बाजार में लाने…
क्या रक्षा सौदों में दलाली रोक पाना असंभव है नरेंद्र देवांगन रक्षा उपकरणों से संबंधित सौदे और विवाद साथ-साथ चलते रहे हैं। ज्यादातर सौदों में दलाली कितनी ली गई और किसने ली, सुर्खियों में आती है लेकिन इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि ये आरोप केवल राजनीतिक हो कर रह जाते हैं। सरकारें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन साबित कुछ नहीं हो पाता। सवाल इतना…
सरकार किसके लिए? अशोक महिश्वरे सरकार राष्ट्र की आत्मा होती हैै। काया के भीतर आत्मा का जो स्थान होता है वही स्थान राष्ट्र के भीतर सरकार का होता है? सरकारें कैसे बनती है? प्रत्येक राष्ट्र की पद्धति भिन्न होती है। यह भिन्नता उस राष्ट्र द्वारा सृजित कानूनी स्वरूप पर आधारित होती हैै। संविधान वर्णित पद्धति में सरकारें सत्तासीन पदच्युत होती है। सरकार…
नरेंद्र देवांगन राष्ट्रीय जागृति तभी ताकत पाती है, तभी कारगर होती है जब उसके पीछे संस्कृति की जागृति हो और आप जानते हैं कि एकता में कितना बल है। अब्राहम लिंकन का कहना है, ‘डेमोक्रेसी इज द गवर्नमेंट ऑफ द पीपुल, वाई द पीपुल एंड फॉर द पीपुल’ अर्थात जनता के द्वारा जनता के लिए तथा जनता का शासन। सरकार राज्य के चार तत्वों में से एक है। सरकार के काम को सुचारू…
मनीष तिवारी बजट पेश करते समय हरेक वित्तमंत्री यह वाक्य अवश्य कहता है कि देश आज संकट के दौर से गुजर रहा है, देश की आर्थिक स्थिति अत्यन्त खराब है। यह वाक्य जब से मैंने होश संभाला है और मुझमें बजट भाषण सुनने की तमीज आई है, तब से हालिया बजट तक सुनता रहा हूँ और इस कठिन परिस्थिति वाले युग में भविष्य में जीवित रहा तो सुनता रहूँगा। आखिर हमारा धर्म सनातन धर्म यूँ…
येन – केन – प्रकारेण के सिद्धांत को मानता है कार्पोरेट जगत! मिथिलेश कुमार सिंह जाने माने फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर की 2006 में एक फिल्म आयी थी कार्पोरेट। कहा जाता है कि मधुर भंडारकर की तमाम फिल्में यथार्थ पर आधारित होती हैं और बिपाशा बसु और के.के. मेनन जैसे अभिनेताओं के अभिनय से सजी यह फिल्म देखने के बाद यह यकीन हो जाता है कि भारतीय…
डा. गौरीशंकर राजहंस पिछले दिनों जिस प्रकार पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने यह एलान किया कि अब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता बंद हो गई है तथा भारत जांचदल पठानकोट के गुनहगारों का पता लगाने के लिए पाकिस्तान नहीं जा सकेगा तो यह जानकर न केवल भारत बल्कि सारी दुनिया के लोग हतप्रभ रह गये। सच यह है कि नवाज शरीफ कुछ भी दावा करें, वे एक अत्यंत…
नरेंद्र देवांगन भ्रष्टाचार वह शब्द है जिससे आज हमारे देश का बच्चा-बच्चा भलीभांति परिचित है क्योंकि आज हर व्यक्ति खुद को संपन्नता और शोहरत के शिखर पर देखना चाहता है और अपने इस सपने को सच करने के लिए वह किसी भी प्रकार के गलत तरीके को अपनाने से नहीं हिचकता और इन्हीं गलत कार्यों से भ्रष्टाचार फैलता है जो आज हमारे देश की अर्थव्यवस्था और पहचान को दीमक की…